लोकतंत्र केवल व्यवस्था नहीं, बल्कि विश्वास का आधार है। परंतु जब यही व्यवस्था स्वार्थ और सत्ता की राजनीति में उलझ जाती है, तब साहित्य ही सच बोलने का साहस करता है। “महाभोज उपन्यास की प्रासंगिकता” एक गंभीर और विचारोत्तेजक अध्ययन है, जिसमें लेखिका शिवांगी जायसवाल ने सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक संरचना और जनसंघर्ष के आयामों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है। उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, प्रतिबद्धता औरवैचारिक स्पष्टता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
इस कृति की भूमिका लेखिका एवं आर्थिक सहयोगकर्ता — विद्यावाचस्पति सम्मानित डॉ. लक्ष्मी जायसवाल हैं। निर्देशिका — डॉ. सन्देशा भावसार, जिनके मार्गदर्शन में यह अध्ययन अकादमिक गंभीरता से समृद्ध हुआ है।
Book, Fiction
महाभोज उपन्यास की प्रासंगिकता
₹230.00
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- Author: शिवांगी जायसवाल
- Page: 53
- Genre: Hindi Literature
- Price: 230
- Format: Paperback
- Publisher: Literature Chronicle
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| Weight | 670 kg |
|---|---|
| Dimensions | 30 × 22 × 8 cm |







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