“परजीवीविज्ञान, प्राणीविज्ञान की एक महत्वपूर्ण शाखा है जो परजीवियों, उनके मेज़बानों तथा उनके बीच होने वाली अंतःक्रियाओं के अध्ययन से संबंधित है। यह विषय विशिष्ट वैकल्पिक पाठ्यक्रम (DSE) पुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित की गई है, ताकि स्नातक विद्यार्थियों को चिकित्सा एवं पशु-चिकित्सा महत्त्व वाले परजीवी जीवों की स्पष्ट, संक्षिप्त तथा अनुप्रयोग-उन्मुख समझ प्रदान की जा सके ।
इस पुस्तक में परजीवियों के प्रमुख समूहों—जैसे प्रोटोजोआ, हेल्मिन्थ्स (नेमाटोड, सेस्टोड एवं ट्रेमाटोड) तथा परजीवी आर्थ्रोपोड्स—को शामिल किया गया है। इसमें वर्गीकरण, आकृति-विज्ञान, जीवन चक्र, संचरण, मेज़बान–परजीवी संबंध, रोगजनन, नैदानिक लक्षण, निदान तथा निवारक उपायों जैसे आवश्यक पहलुओं पर विशेष प्रकाश डाला गया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण परजीवियों, जैसे Plasmodium, Entamoeba histolytica, Leishmania, Ascaris lumbricoides तथा Wuchereria bancrofti, का सरल एवं व्यवस्थित रूप में वर्णन किया गया है ।
NEP 2020 के अनुरूप, इस पुस्तक की विषय-वस्तु को संकल्पनात्मक स्पष्टता, आलोचनात्मक चिंतन तथा कौशल विकास को प्रोत्साहित करने हेतु तैयार किया गया है। साथ ही, इसमें परजीवीविज्ञान को प्रतिरक्षा-विज्ञान, सूक्ष्मजीवविज्ञान तथा जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए अंतर्विषयी दृष्टिकोण भी समाहित किए गए हैं ।
इस पुस्तक में स्पष्ट रूप से अंकित चित्र, प्रवाह-आलेख तथा मूल्यांकन उपकरण जैसे बहुविकल्पीय प्रश्न, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न सम्मिलित हैं। यह प्रभावी अधिगम को समर्थन देने, परीक्षा की तैयारी को सुदृढ़ बनाने तथा जीवन-विज्ञान, स्वास्थ्य सेवाओं एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आगे की पढ़ाई और करियर हेतु एक मजबूत आधार प्रदान करने का उद्देश्य रखती है ।”







Reviews
There are no reviews yet.