“जेंडर : समकालीन सामाजिक समस्याएँ एवं समाधान एक समसामयिक, शोधपरक एवं शिक्षार्थी-केंद्रित पुस्तक है, जिसका उद्देश्य जेंडर अध्ययन के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों को सरल, वैज्ञानिक तथा विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करना है। वर्तमान वैश्विक एवं भारतीय परिप्रेक्ष्य में जेंडर केवल स्त्री एवं पुरुष की जैविक भिन्नता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा मनोवैज्ञानिक आयामों से जुड़ा एक व्यापक विमर्श है। यह पुस्तक जेंडर की अवधारणा, लिंग एवं जेंडर के अंतर, लैंगिक समाजीकरण, नारीवादी दृष्टिकोण, लैंगिक समानता, संवैधानिक अधिकार, मानवाधिकार तथा समकालीन सामाजिक चुनौतियों का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में महिलाओं, पुरुषों तथा ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का समावेश करते हुए लैंगिक असमानता, हिंसा, भेदभाव, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, प्रजनन एवं मानसिक स्वास्थ्य, पोषण संबंधी असमानताएँ तथा डिजिटल युग की नई चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020, सतत विकास लक्ष्य (SDGs), संवैधानिक मूल्यों तथा समावेशी विकास के संदर्भ में जेंडर न्याय एवं समान अवसरों की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है।
पुस्तक की प्रत्येक इकाई में प्रस्तावना, उद्देश्य, विषय-वस्तु, सारांश, अभ्यास कार्य, बोध प्रश्न, कठिन शब्द तथा APA 7 शैली में संदर्भ ग्रंथ दिए गए हैं, जिससे यह विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं अध्यापकों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाती है। यह पुस्तक शिक्षा, समाजशास्त्र, महिला अध्ययन, जेंडर अध्ययन, सामाजिक कार्य तथा शिक्षक शिक्षा (B.Ed., M.Ed., ITEP एवं अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों) के विद्यार्थियों एवं अध्यापकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में उपयोगी सिद्ध होगी। यह कृति पाठकों में लैंगिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय, समानता तथा समावेशी दृष्टिकोण विकसित करने में सार्थक योगदान प्रदान करती है।”







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