इस किताब में कुछ कविताएँ, शायरी, ग़ज़लें, नज़्में जीवन में आए हालातों से सोचने पर मजबूर कर देने वाले ख़्याल लिखे गए हैं, जो लेखक ने ज़माने में डूबकर और ज़माने से बिछड़ के लिखें। इस किताब में जीवन के अनेक पहलुओं को समझकर शब्दों से न्याय देने का प्रयास किया गया है। उनका मक़सद जीवन में जो सबसे अनमोल “”सादगी”” और समाज में “”तर्कशील”” जीवन व्यतीत करना है, उसे ही केवल बढ़ावा देना है,और लेखक के दृष्टिकोण की तरह जीवन को एक “अनोखे जीवन” की तरह समझना है।
इस किताब के लेखक “सत्यम चौधरी” है, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के गाँव “पड़री खुर्द” में हुआ । फ़िलहाल वह हरियाणा में “फरीदाबाद” में रहते हैं,व 12वी कक्षा में अपनी शिक्षा को पूरी कर रहे हैं । अपने जीवन में एक लेखक की दृष्टिकोण अनुसार “जावेद अख़्तर” और “साहिर लुधियानवी” को वह जीवन में प्रेरणास्रोत बनाए हुए थे और हैं । इस किताब पर वह 9वी कक्षा से काम कर रहे थें, उनका जीवन संघर्षों से गुज़रता रहा, हर वक्त वह इस आस में जीते रहे कि उनके इन विचारों को वो लोगों तक पहुंँचाएंँगे, ताकि उनके विचारों से लोग वाक़िफ हो सकें,अपने जीवन में कभी रुकने का इरादा नहीं किया । परिवार की बुरी स्थिति ने उन्हें स्थिर व मज़बूत बनाया, जिससे उन्हें ख़ुद को और ज़माने को और ज़्यादा जानने का अवसर मिला, उसी स्थिति में यह सभी ख़्याल लिखें गए ।
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