“यह पुस्तक एक ऐसी लड़की की कहानी है, जो ज़्यादातर समय उलझन में रहती है। वह हमेशा दिल और दिमाग के बीच फँसी रहती है। न तो वह अपने दिल की पूरी सुन पाती है और न ही दिमाग के फैसलों पर भरोसा कर पाती है।
कहानी में एक सर (शिक्षक) की एंट्री होती है, जो उसकी ज़िंदगी में एक खास जगह बना लेते हैं। उनकी मौजूदगी उसकी सोच, उसके फैसलों और उसकी भावनाओं को बदलने लगती है। लेकिन एक दिन अचानक सब कुछ खत्म हो जाता है।
आख़िर में वह लड़की हर सवाल, हर दर्द और हर उलझन को भगवान पर छोड़ देती है”







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